उर्दू-बंगला टीईटी शिक्षकों की सेवा बहाली की मांग, सांसद ने CM को लिखा पत्र

बिहार के सरकारी स्कूलों में कार्यरत उर्दू-बंगला टीईटी उत्तीर्ण शिक्षकों की नौकरी पर मंडराते संकट ने अब राजनीतिक तूल पकड़ लिया है। किशनगंज लोकसभा क्षेत्र के सांसद डॉ. मोहम्मद जावेद आजाद ने इस गंभीर मामले में हस्तक्षेप करते हुए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने शिक्षकों की सेवा समाप्ति के आदेश पर पुनर्विचार करने और उनकी सेवा बहाली की पुरजोर मांग की है।
क्या है पूरा विवाद?
मामला शिक्षकों की नियुक्ति की वैधता से जुड़ा है। सांसद ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि इन शिक्षकों की नियुक्ति विभागीय अधिसूचना संख्या 1769, दिनांक 24 नवंबर 2014 के आलोक में की गई थी। हालांकि, अब प्राथमिक शिक्षा निदेशालय के एक हालिया पत्रांक के आधार पर उनकी सेवा समाप्ति की कार्रवाई की जा रही है। इस प्रशासनिक कदम से हजारों शिक्षकों के भविष्य और उनके परिवारों की आजीविका पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं।
सांसद ने रखी ये प्रमुख मांगें
डॉ. जावेद आजाद ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इस संवेदनशील मामले में सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए न्यायोचित समाधान निकालना चाहिए। उन्होंने मामले की निष्पक्ष समीक्षा के लिए निम्नलिखित मांगें रखी हैं:
- उच्चस्तरीय समिति का गठन: संबंधित विभागीय अभिलेखों और न्यायिक आदेशों की गहन जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई जाए।
- सेवा समाप्ति पर रोक: जब तक समीक्षा की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक सेवा समाप्ति की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए और शिक्षकों को अंतरिम राहत दी जाए।
- पक्ष रखने का अवसर: किसी भी अंतिम निर्णय पर पहुँचने से पहले प्रभावित शिक्षकों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर दिया जाना चाहिए।
हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट
सांसद ने जोर देकर कहा कि यह मामला केवल नौकरी तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे हजारों परिवारों का आर्थिक और सामाजिक भविष्य जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि जो शिक्षक लंबे समय से अपनी सेवाएं दे रहे हैं, उनके मामले में संवेदनशीलता और निष्पक्षता बर